SHABD-Poems in Hindi

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कागज़ के टुकड़े
इस हँसी पर मत जाना,
बहुत दर्द छिपा रखा है |
इन आँखों मे मत उतरना,
एक सैलाब दबा रखा है|
इस रफ्तार पर मत जाना,
गिर-गिरकर सीखा है चलना|
इस कामयाबी से मत जलना,
ख़ून से अदा की है, इसकी क़ीमत|
पता है मुझे, इस जहान मे तुम्हारा हीं बोल-बाला है,
पता है मुझे, इस जहान मे भगवान तक बिकते हैं|
पर पैसे से मुझे खरीद नहीं पाओगे ,
ये कागज़ के टुकड़े हैं,
इन कागज़ के टुकड़ों की कश्ती बनाकर,
कई बार पानी मे खेला है मैंने!
ईमन

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आज फिर बहुत ज़ोरों की बारिश हुई
फिर आखें गीली हैं
फिर से किसी ने समझने का दावा किया
और मैं यूं हीं बोल पड़ी
अच्छा आपने भी अपने घर को जलते हुए देखा है

ईमन

एक न सुनाई देने वाली चीख
बिना छ्वान की धूप
जंग सी रोज़
ज़िंदगी क्यूँ बन गयी ?
क्या तुम्हारा न होना नकाफी था
की रोज़ एक नयी उलझन
एक नयी कश्मकश
ज़िंदगी बन गयी

ईमन

अजनबियों मैं ढूंढती रही अपनों को
भूली हुई गलियों से गुजरते हुए लगा
बेफिक्र हसी की आवाज़ जानी पहचानी है
कभी मैं भी ऐसे हीं हसां करती थी

ईमन

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